आयुष मलिक
इमेज कैप्शन,आयुष मलिक ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील कर अपनी स्वतंत्रता बहाल करने की मांग की थी

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  • प्रकाशित16 सितंबर 2026
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

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उत्तर प्रदेश के शामली ज़िले के दवा कारोबारी आयुष मलिक के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार को माना कि उन्होंने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम धर्म कुबूल किया था.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आयुष मलिक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निपटारा करते हुए उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता बहाल कर दी है.

जस्टिस संदीप जैन ने कहा कि आयुष मलिक बालिग हैं और अपने जीवन से जुड़े फ़ैसले लेने में सक्षम हैं.

क़ानूनी मदद देने वाली संस्था एसोसिएशन फ़ॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ सिविल राइट (एपीसीआर) ने आयुष मलिक को क़ानूनी सहायता मुहैया कराई थी.

अदालत के सामने आयुष ने कहा कि उन्होंने 2014 में अपनी इच्छा से इस्लाम अपनाया था और इस फ़ैसले में किसी तरह का दबाव, धमकी, अनुचित प्रभाव या प्रलोभन नहीं था.

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एपीसीआर से जुड़े नदीम ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया कि अदालत ने माना कि वो बालिग हैं और ये उनका हक़ है कि वो जिस धर्म को चाहें उसे मानें और जिससे शादी करना चाहें उससे शादी करें. इसमें किसी स्टेट या किसी तीसरे आदमी का कोई रोल नहीं हो सकता है.

ग़ौरतलब है कि इस साल जून महीने में आयुष के पिता देवराज मलिक की शिकायत के बाद शामली पुलिस ने कथित ‘साज़िशन धर्म परिवर्तन’ के आरोप में उनकी कथित पत्नी चांदनी क़ुरैशी और ससुर इस्लाम क़ुरैशी को गिरफ़्तार किया था.

इसके बाद जून के आख़िर में आयुष मलिक का ऐसा कथित वीडिया सामने आया था जिसमें आयुष मलिक पूजा करते नज़र आ रहे थे.

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्या कहा?

आयुष मलिक का दावा है कि उन्होंने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम धर्म अपनाया और मोहम्मद अली नाम रखा.
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आयुष मलिक की बंदी प्रत्यक्षीकरण से जुड़ी याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर की गई थी जिस पर बुधवार को सुनवाई हुई.

इस दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आयुष मलिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता बहाल कर दी है.

हाई कोर्ट ने कहा कि आयुष बालिग हैं और अपने जीवन से जुड़े फ़ैसले लेने में सक्षम हैं.

अदालत के सामने आयुष ने कहा कि उन्होंने 2014 में अपनी इच्छा से इस्लाम अपनाया था और इस फ़ैसले में किसी तरह का दबाव, धमकी, अनुचित प्रभाव या प्रलोभन नहीं था.

उन्होंने चांदनी क़ुरैशी से शादी करने की इच्छा भी जताई. कोर्ट ने कहा कि बालिग व्यक्ति को अपनी अंतरात्मा के अनुसार धर्म चुनने और अपने जीवनसाथी का चुनाव करने का संवैधानिक अधिकार है.

अदालत ने कहा कि आयुष की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर रोक जारी रखने का कोई क़ानूनी आधार नहीं है और उन्हें अपनी पसंद की जगह पर तथा अपनी इच्छा से चुने व्यक्ति के साथ रहने, अपनी पसंद का धर्म मानने और वैवाहिक संबंध के बारे में क़ानून के मुताबिक़ फ़ैसला लेने की स्वतंत्रता है.

स्थानीय रिपोर्टर पंकज कुमार से आयुष मालिक के पिता देवराज मलिक ने अदालत के फ़ैसले के बाद फ़ोन पर बात करते हुए कहा कि कोर्ट का आदेश मानेंगे और कोर्ट ने पुलिस हटाने का आदेश दिया है जबकि पुलिस वाले कभी कभी ही आते थे.

ये याचिका दायर किए जाने के समय आयुष मलिक ने फ़ोन पर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बात करते हुए कहा था, “मैं अदालत के ज़रिए अपनी धार्मिक स्वतंत्रता हासिल करना चाहता हूं इसलिए अदालत का रुख़ कर रहा हूं, मुझे उम्मीद है कि मेरी बात सुनी जाएगी.”

इस फ़ैसले के बाद आयुष मलिक की ओर से जिरह करने वाले वकील उमर ख़ालिद ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, “आयुष मलिक ने जो इस्लाम धर्म अपनाया था उसको लेकर कोर्ट में अपनी बात साफ़ की. उनके पिताजी ने और कुछ प्रशासन की मदद से उनको घर में कैद करके रखा गया था. 30-35 दिन बाद उनको दुकान पर बैठने की इजाज़त मिली थी लेकिन घर से बाहर निकलने की इजाज़त नहीं मिलती थी.”

“अदालत ने यही फ़ैसला दिया कि इनको मुक्त किया जाता है और पुलिस वालों की कस्टडी में अभी ये नहीं रहेंगे. ये स्वतंत्र रूप से जहां जाना चाहें जाएं, जो भी धर्म मानना चाहें और जिस लड़की से चाहे शादी करें.”

आयुष मलिक की कथित पत्नी चांदनी क़ुरैशी की गिरफ़्तारी को लेकर वकील उमर ख़ालिद ने कहा, “क़ुरैशी पर जो एफ़आईआर हुई थी, आगे हम लोग उस एफ़आईआर को ख़त्म कराने की कोशिश करेंगे.”